The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 माता सुंदरी महिला महाविद्यालय में वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव ‘सारंग 2026’ का सफल आयोजन     🔴 Spoton Global Group के भव्य समारोह में 100+ छात्राओं का सम्मान, ‘आत्मनिर्भर महिला’ अभियान को मिली नई दिशा     🔴 दिल्लीफार्मास्युटिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमियों हेतुउद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम हुआ आयोजित     🔴 विश्वविद्यालय का उद्देश्य खिलाड़ियों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है : अशोक कुमार कुलपति     🔴 दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) की पहल: डिजिटल लोक अदालत से ट्रैफिक चालान निस्तारण हुआ आसान और पारदर्शी     🔴 एकंगरसराय में दर्दनाक हादसा: रेलवे ट्रैक पर मालगाड़ी की चपेट में आने से युवक की मौत     🔴 इस्लामपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: विशेष अभियान में दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए     🔴 वैलेंटाइन डे विवाद: युवक-युवती को अलग कर हाथ में थमाई हनुमान चालीसा, तस्वीर वायरल     🔴 बिहार के नालंदा में युवक की आत्महत्या: दीपनगर इलाके से दुखद घटना     🔴 दिल्ली में वैलेंटाइन डे पर सनसनी: विश्वास नगर के संतोष रेजिडेंसी होटल से युवती ने लगाई छलांग, हालत स्थिर    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

AI अब इंटिमेसी में कदम रख रहा है, लेकिन अकेलेपन का संकट नहीं मिटा सकता

Technology  •  👁 18 views  •  26 Jan 2026
AI अब इंटिमेसी में कदम रख रहा है, लेकिन अकेलेपन का संकट नहीं मिटा सकता
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कामकाजी उपकरण या स्मार्ट असिस्टेंट तक सीमित नहीं रह गया है। टेक्नोलॉजी कंपनियां अब AI आधारित चैटबॉट और वर्चुअल पार्टनर विकसित कर रही हैं, जो उपयोगकर्ताओं के भावनात्मक जुड़ाव और इंटिमेसी की ज़रूरतों को पूरा करने का दावा करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जबकि AI व्यक्ति को सुन सकता है, उसके साथ संवाद कर सकता है और व्यक्तिगत सलाह भी दे सकता है, लेकिन यह अकेलेपन या भावनात्मक कमियों का स्थायी समाधान नहीं है। मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि वास्तविक मानव संपर्क, सहानुभूति और भावनात्मक गहराई केवल इंसान के बीच मौजूद होती है।
एक अध्ययन के अनुसार, AI के साथ संवाद करने वाले लोग अल्पकालिक राहत महसूस कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय में सामाजिक अलगाव की भावनाएं बढ़ सकती हैं। AI आधारित इंटिमेसी टूल्स, चाहे वह रोमांटिक चैटबॉट हों या डिजिटल साथी, केवल तकनीकी सहारा हैं, मानव संबंधों की जगह नहीं ले सकते।
सामाजिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि AI पर ज्यादा निर्भरता, खासकर भावनात्मक जुड़ाव के लिए, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इसके बजाय, AI का इस्तेमाल अकेलेपन के समाधान के लिए सहायक उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए, न कि अंतिम समाधान के रूप में।
टेक्नोलॉजी और मानव इंटिमेसी के इस नए युग में, संतुलन बनाना जरूरी है। AI हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना सकता है, लेकिन सच्चा जुड़ाव और भावनात्मक समर्थन केवल इंसानी संबंधों से ही आता है।