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“रिश्वत मांगना और लेना दोनों अपराध”: कर्नाटक हाई कोर्ट ने तिप्तूर के असिस्टेंट प्रॉसिक्यूटर के खिलाफ कार्रवाई रद्द करने से किया इनकार

Crime   •   👁 27 views   •   30 Dec 2025
“रिश्वत मांगना और लेना दोनों अपराध”: कर्नाटक हाई कोर्ट ने तिप्तूर के असिस्टेंट प्रॉसिक्यूटर के खिलाफ कार्रवाई रद्द करने से किया इनकार
कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि रिश्वत मांगना और रिश्वत लेना—दोनों ही कानूनन अपराध हैं। इसी सिद्धांत को दोहराते हुए अदालत ने तिप्तूर में तैनात एक असिस्टेंट प्रॉसिक्यूटर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया।
मामले में आरोपी असिस्टेंट प्रॉसिक्यूटर पर आरोप था कि उसने एक केस से जुड़े पक्ष से अवैध लाभ की मांग की थी। आरोपी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि रिश्वत वास्तव में ली नहीं गई थी। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में केवल रिश्वत लेना ही नहीं, बल्कि रिश्वत की मांग करना भी गंभीर अपराध है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर प्रारंभिक साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि आरोपी ने अवैध मांग की थी, तो केवल इस आधार पर कार्यवाही को रद्द नहीं किया जा सकता कि रकम का लेन-देन पूरा नहीं हुआ।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में ट्रायल के दौरान सबूतों की जांच होना जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय सरकारी अधिकारियों और अभियोजन पक्ष से जुड़े कर्मियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में न्यायालय किसी भी तरह की ढील नहीं देगा।