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कुल 1,54,656 मामलों का निपटारा किया गया तथा दिल्ली भर में 1,26,399 ट्रैफिक चालानों का निपटारा कर बनाया रिकॉर्ड

Education   •   👁 33 views   •   24 Mar 2026
कुल 1,54,656 मामलों का निपटारा किया गया तथा दिल्ली भर में 1,26,399 ट्रैफिक चालानों का निपटारा कर बनाया रिकॉर्ड
दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) ने, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के मार्गदर्शन में, वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। यह आयोजन दिल्ली के सभी जिला न्यायालय परिसरों, दिल्ली उच्च न्यायालय, स्थायी लोक अदालतों, ऋण वसूली अधिकरण, राज्य उपभोक्ता आयोग तथा जिला उपभोक्ता आयोगों में किया गया।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों को शामिल किया गया, जैसे—चेक बाउंस (धारा 138), समझौता योग्य आपराधिक मामले, सिविल मामले, मोटर दुर्घटना दावा मामले, बैंक वसूली के मामले, वैवाहिक विवाद (तलाक को छोड़कर), भूमि अधिग्रहण मामले, श्रम विवाद, मध्यस्थता से जुड़े मामले तथा समझौता योग्य ट्रैफिक चालान।
लोक अदालत के दौरान माननीय न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव, न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, DSLSA, के साथ श्री गुरविंदर पाल सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दक्षिण), सुश्री निवेदिता अनिल शर्मा, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दक्षिण-पूर्व) तथा श्री राजीव बंसल, सदस्य सचिव, DSLSA ने साकेत न्यायालय परिसर का दौरा किया और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
इस दौरान माननीय न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, एसिड अटैक पीड़ितों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से सम्मानित किया, जो लोक अदालत में एसोसिएट सदस्य के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह कदम DSLSA की समावेशी सोच और समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत प्रणाली सहित विभिन्न सुविधाओं का भी निरीक्षण किया।
श्री राजीव बंसल, सदस्य सचिव, DSLSA ने बताया कि प्राधिकरण वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत विवादों के आपसी समझौते का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालतों में ट्रांसजेंडर, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लोग और एसिड अटैक पीड़ितों को भी शामिल किया गया।
DSLSA का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से न्याय सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है, विशेषकर ट्रैफिक चालानों के लंबित मामलों और उनके निस्तारण में होने वाली देरी को कम करना।
दिल्ली के लोगों ने इस राष्ट्रीय लोक अदालत में उत्साहपूर्वक भाग लिया। लोगों ने सरल प्रक्रिया की सराहना की, जिससे लंबी कतारों से छुटकारा मिला। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस पोर्टल से तुरंत अपडेट और मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से पुष्टि मिलने से लोगों को सुविधा हुई।
न्यायिक अधिकारियों ने इस पहल को न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। न्यायालय के कर्मचारियों ने भी संतोष व्यक्त किया कि नई प्रणाली से उन्हें पहले की तरह लंबे समय तक मैनुअल अपडेट करने का कार्य नहीं करना पड़ा।
आज की राष्ट्रीय लोक अदालत में भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए विशेष ध्यान रखा गया। न्यायालयों में हेल्प डेस्क, व्हीलचेयर, रैंप, शौचालय और पीने के पानी जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम किए गए। प्रत्येक न्यायालय परिसर के प्रवेश द्वार पर विशेष हेल्प डेस्क लगाए गए, जहां लोगों को आवश्यक जानकारी और सहायता प्रदान की गई।
जिला न्यायालयों में कुल 1,54,656 मामलों का निपटारा किया गया तथा कुल समझौता राशि ₹ 243.34 करोड़ रही।
उपरोक्त में, दिल्ली भर में 1,26,399 ट्रैफिक चालानों का निपटारा किया गया, जिनकी कुल राशि ₹ 2.13 करोड़ रही।
DSLSA को यह बताते हुए गर्व है कि एम.ए.सी.टी. डी.ए.आर. संख्या 502/21, “सिमांशु बनाम बबलू” नामक मामला, नई दिल्ली जिला न्यायालय (पटियाला हाउस कोर्ट) में ₹ 1.45 करोड़ की राशि पर निपटाया गया, जो बीमा कंपनी द्वारा मोटर दुर्घटना पीड़ित के आश्रितों को दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 2017 का एक पुराना मामला, एम.ए.सी.टी. केस संख्या 353/2017 “सबीरानो बनाम विजय सिंह”, का भी आज दक्षिण-पश्चिम डीएलएसए, द्वारका में आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
दिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली में भी लोक अदालत की बेंच गठित की गई, जहां 34 मामलों का निपटारा ₹ 8.23 करोड़ (लगभग) की राशि पर किया गया।
जिला उपभोक्ता आयोगों में गठित लोक अदालत बेंचों द्वारा 129 मामलोंका निपटारा ₹ 5.42 करोड़ की राशि पर किया गया।
ऋण वसूली अधिकरणों (DRTs), में गठित लोक अदालत बेंचों द्वारा 79 मामलों का निपटारा ₹ 90.45 करोड़ (लगभग) की राशि पर किया गया।
स्थायी लोक अदालतों में बिजली से संबंधित मामलों के लिए गठित बेंच द्वारा 783 मामलों का निपटारा ₹ 3.16 करोड़ की राशि पर किया गया।
कुल मिलाकर 1,55,681 मामलों का निपटारा किया गया तथा कुल समझौता राशि ₹ 350.63 करोड़ रही।
दिल्ली के सभी न्यायिक अधिकारियों ने लोक अदालत में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा पक्षकारों ने भी अपने मामलों के सौहार्दपूर्ण निपटान हेतु उत्साहपूर्वक भागीदारी की।