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कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने NATO के ज़रिए आर्कटिक सुरक्षा बढ़ाने की ‘प्रगति’ का स्वागत किया

International   •   👁 16 views   •   22 Jan 2026
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने NATO के ज़रिए आर्कटिक सुरक्षा बढ़ाने की ‘प्रगति’ का स्वागत किया
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने NATO के सहयोग से आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति का खुले तौर पर स्वागत किया है। कार्नी ने यह बयान World Economic Forum, दावोस (स्विट्ज़रलैंड) के दौरान दिया, जहाँ NATO महासचिव मार्क रूत्ते सहित अन्य नेताओं के साथ आर्कटिक सुरक्षा मुद्दे पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कनाडा और उसके सहयोगी आर्कटिक क्षेत्र के सामूहिक संरक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।
कार्नी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा, “NATO के संयुक्त प्रयासों के माध्यम से आर्कटिक सुरक्षा बढ़ाने की प्रगति से मैं प्रसन्न हूँ। हम अपने NATO सहयोगियों, विशेषकर Nordic‑Baltic 8 देशों के साथ मिलकर इस क्षेत्र की रक्षा करेंगे।”
इस प्रगति की पृष्ठभूमि में, आर्कटिक क्षेत्र को लेकर बढ़ते भू‑राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियाँ हैं, विशेष रूप से रूस जैसे देशों की गतिविधियों के कारण। NATO के नेताओं ने ग्रीनलैंड और उच्च उत्तर महासागरीय क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा उपस्थिति मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का सामूहिक रूप से सामना किया जा सके।
कार्नी की टिप्पणियाँ इस बात की पुष्टि करती हैं कि कनाडा समुदायिक सुरक्षा और NATO गठबंधन के सामूहिक रक्षा ढांचे का हिस्सा बनने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आर्कटिक की सुरक्षा केवल एक देशों का मामला नहीं है, बल्कि यह सभी NATO सदस्यों की संयुक्त प्राथमिकता है।
दावोस में आयोजित इन बैठकों के दौरान नेताओं ने नाटो के उत्तर‑पश्चिमी फ्रंट पर निवेश और सामरिक तैयारियों को तेज करने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही, उन्होंने इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने तथा गठबंधन के सदस्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया।
👉 संक्षेप में: आर्कटिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए NATO के कार्यक्रम में प्रगति को कार्नी ने सकारात्मक रूप से देखा है, और कनाडा इस रणनीति का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है — इससे क्षेत्रीय रक्षा और गठबंधन की एकता दोनों को बल मिलेगा।