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लेऑफ की सच्चाई के बावजूद डेवोस के टेक बॉस AI जॉब्स पर दांव लगा रहे हैं

Nature  •  👁 12 views  •  24 Jan 2026
लेऑफ की सच्चाई के बावजूद डेवोस के टेक बॉस AI जॉब्स पर दांव लगा रहे हैं
विश्व डावोस (WEF 2026) में तकनीकी कंपनियों के प्रमुख AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर जो आज़ादी से भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं, वे असल स्थिति से काफी अलग हैं। जबकि टेक सेक्टर में बड़े पैमाने पर ले‑ऑफ और छंटनी जारी है और कई कंपनियाँ कर्मचारियों को हटाकर लागत बचाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं उद्योग के नेता बार‑बार कह रहे हैं कि AI नई नौकरियाँ पैदा करेगा और रोजगार के अवसर बढ़ाएगा।
डावोस में कई बड़े टैक CEO ने भरोसा जताया कि AI रोजगार का भविष्य है और यह नई “जॉब क्रिएशन मशीन” बन सकता है। उनका कहना है कि AI तकनीक डाटा, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में व्यापक रोजगार उत्पन्न करेगी और पुराने तरीकों से अलग तरह की तकनीकी और ट्रेंड स्किल रिक्वायरमेंट वाली नौकरियाँ सामने आएँगी।
दूसरी ओर, IMF की प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जिएवा ने भी डावोस में आगाह किया कि AI एक तरह का “समुद्री लहर (tsunami)” है जो लैबर मार्केट को तहस‑नहस कर सकता है। उनका कहना है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में लगभग 60% और वैश्विक स्तर पर 40% नौकरियाँ या तो बदली जाएँगी, हटाई जाएँगी या घटी जाएँगी — खासकर नौकरी शुरू करने वाले युवा वर्ग के लिए।
असल में टेक उद्योग पहले ही बड़े पैमाने पर छंटनी कर चुका है, जिसमें Amazon, Microsoft, Meta, TCS और अन्य कंपनियों ने लाखों कर्मचारियों की नौकरियाँ कम कर दी हैं या रणनीतिक बदलावों के लिए कामकाजी ढांचे को छोटा किया है। ये छंटनियाँ इस वजह से हैं कि AI और ऑटोमेशन को अपनाने से कम कर्मचारियों में ही कार्य पूरा करना अधिक प्रभावी माना जा रहा है।
इस तालमेल‑हीन संदेश के परिणामस्वरूप विवाद खड़ा हो गया है: जहां एक तरफ़ टेक बॉस AI को आकर्षक रोजगार भविष्य के रूप में पेश करते हैं, वहीं वास्तविक ले‑ऑफ डेटा और IMF की चेतावनी बताती है कि AI तकनीक समाज के लिए चुनौती और संकट दोनों बन सकती है। इसका सीधा असर युवा रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, और टेक्नोलॉजी‑अनुकूल शिक्षा नीति पर पड़ेगा, जिससे साफ़ तौर पर यह संकेत मिलता है कि सिर्फ़ आशावाद ही पर्याप्त नहीं — नौकरी संरचना के अनुकूल प्रशिक्षण और नीति बहुल बदलाव भी जरूरी हैं।