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सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार: डॉलर की अस्थिरता और संभावित कर्ज संकट से रिकॉर्ड तेजी

Economy  •  👁 17 views  •  28 Jan 2026
सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार: डॉलर की अस्थिरता और संभावित कर्ज संकट से रिकॉर्ड तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने एक ऐतिहासिक पड़ाव पार करते हुए 5,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू लिया है। यह उछाल केवल मांग-आपूर्ति का नतीजा नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, डॉलर की कमजोर होती स्थिति और बढ़ते कर्ज संकट की आशंकाओं का संकेत भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में भरोसा लगातार डगमगा रहा है। अमेरिका पर बढ़ता सार्वजनिक कर्ज, ऊँचा ब्याज बोझ और लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ रहा है। ऐसे माहौल में सोना एक बार फिर “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश के रूप में उभरा है।
इसके अलावा, कई केंद्रीय बैंक—खासकर एशिया और मध्य पूर्व के देशों के—तेजी से अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। वे डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध की आशंकाएँ और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता ने भी सोने की मांग को और बढ़ाया है।
महंगाई की चिंता भी इस तेजी का एक अहम कारण है। भले ही कुछ देशों में मुद्रास्फीति नियंत्रित होती दिख रही हो, लेकिन लंबी अवधि में करेंसी के अवमूल्यन का डर निवेशकों को सोने की ओर खींच रहा है। डिजिटल मुद्राओं और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच सोना अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प माना जा रहा है।
भारत जैसे देशों में इसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है। सोने के दाम बढ़ने से गहनों की खरीद महंगी हो गई है, लेकिन निवेश के लिहाज से सोने में रुचि बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डॉलर की स्थिति और बिगड़ती है या वैश्विक कर्ज संकट गहराता है, तो सोने की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
कुल मिलाकर, 5,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर केवल एक आर्थिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में गहरे बदलावों का संकेत है—जहाँ भरोसे की मुद्रा एक बार फिर सोना बनता दिख रहा है।