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बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति का संसद संबोधन: संविधान क्या कहता है?

Economy  •  👁 21 views  •  29 Jan 2026
बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति का संसद संबोधन: संविधान क्या कहता है?
भारत में बजट सत्र शुरू होने से पहले राष्ट्रपति का संसद को संबोधित करना एक पारंपरिक और संवैधानिक प्रक्रिया है। इसे लेकर अक्सर सवाल उठते हैं कि संविधान इस मामले में क्या निर्देश देता है और इसका उद्देश्य क्या है।
संविधान के अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह संसद के किसी भी सत्र के दौरान अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। विशेष रूप से बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति का यह संबोधन संसद को वर्ष के आर्थिक, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर मार्गदर्शन देने के लिए होता है। इसे कभी-कभी “राज्य का मार्गदर्शन” भी कहा जाता है।
राष्ट्रपति के संबोधन का मुख्य उद्देश्य संसद में चर्चा को दिशा देना और सरकार की नीतियों तथा प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालना है। हालांकि, राष्ट्रपति केवल एक सलाहकार और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं; यह संबोधन विधायी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होता और इसे पारित करने की आवश्यकता नहीं होती।
संविधान इसे इसलिए सुनिश्चित करता है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में राष्ट्रपति की स्थायी दृष्टि और संवैधानिक जिम्मेदारी बनी रहे। बजट सत्र से पहले यह संबोधन विधायकों को आने वाले सत्र की गंभीरता और प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम केवल औपचारिकता नहीं है। यह संसद में राजनीतिक और आर्थिक बहस को संतुलित और केंद्रित रखने में मदद करता है। साथ ही, यह राष्ट्रीय दृष्टिकोण से निर्णय लेने में सांसदों को दिशा प्रदान करता है।
इस प्रकार, बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति का संसद संबोधन संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार का हिस्सा है, जो लोकतंत्र में संतुलन और मार्गदर्शन सुनिश्चित करता है। यह प्रक्रिया संसद की गंभीरता और नीति निर्धारण में योगदान के लिए अहम मानी जाती है।