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इकोनॉमिक सर्वे: जियोपॉलिटिक्स और कैपिटल फ्लो में रुकावट से दबाव में भारत, रुपये में दिखी गिरावट

Economy  •  👁 21 views  •  29 Jan 2026
इकोनॉमिक सर्वे: जियोपॉलिटिक्स और कैपिटल फ्लो में रुकावट से दबाव में भारत, रुपये में दिखी गिरावट
भारत की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह में आई रुकावट का असर साफ नजर आने लगा है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, दुनिया एक संभावित “अव्यवस्थित मल्टीपोलर ब्रेकडाउन” की ओर बढ़ रही है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं, खासकर भारत, के लिए जोखिम बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिल रहा है।
सर्वे में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार प्रतिबंध, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वित्तीय अनिश्चितता ने विदेशी निवेशकों के व्यवहार को प्रभावित किया है। नतीजतन, कैपिटल फ्लो में रुकावट आई है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा और उसकी वैल्यू में गिरावट दर्ज की गई।
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, दुनिया में आर्थिक शक्ति का संतुलन अब एक व्यवस्थित ढांचे के बजाय कई ध्रुवों में बंटता जा रहा है। यह मल्टीपोलर व्यवस्था अगर असंतुलित रही, तो वैश्विक वित्तीय स्थिरता को नुकसान पहुंच सकता है। भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं को इसका सामना मुद्रा अस्थिरता, निवेश में कमी और बाहरी झटकों के रूप में करना पड़ सकता है।
हालांकि, सर्वे यह भी रेखांकित करता है कि भारत की घरेलू आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। मजबूत उपभोग मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और नीतिगत सुधार भारत को वैश्विक अस्थिरता से निपटने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, विदेशी मुद्रा भंडार और सतर्क मौद्रिक नीति रुपये को अत्यधिक गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत को जियोपॉलिटिकल जोखिमों को ध्यान में रखते हुए पूंजी प्रवाह को स्थिर रखने और आर्थिक लचीलापन बढ़ाने पर फोकस करना होगा, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं का असर सीमित रखा जा सके।