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“अमिताव घोष: अमीरों की ‘प्रलय तैयारी’ क्या हमारे भविष्य की असली चिंता बताती है?”

International   •   👁 20 views   •   29 Jan 2026
“अमिताव घोष: अमीरों की ‘प्रलय तैयारी’ क्या हमारे भविष्य की असली चिंता बताती है?”
विश्व विख्यात लेखक अमिताव घोष ने एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ी है जिसमें वे दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति—विशेषकर सिलिकॉन वैली के प्रमुख—की प्रलय-तैयारी (apocalypse prepping) पर प्रश्न उठाते हैं। घोष का कहना है कि कुछ शक्तिशाली लोग “द घटना (The Event)” नामक संभावित वैश्विक संकट — जिसमें सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक प्रणालियों का पतन शामिल है — के लिए स्वयं को सुरक्षित ठिकानों और बंकरों में संरक्षण का इंतज़ाम करते दिख रहे हैं। यह सोच केवल व्यक्तिगत बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि एक खतरनाक समाज से विमुख होने की मानसिकता को भी दर्शाती है।
घोष के विचार में यह प्रवृत्ति हमारी “कल्पना की संकट” को उजागर करती है — यानी अमीर वर्ग केवल अपने बचाव के बारे में सोच रहा है, जबकि बाकी दुनिया संभावित आपदाओं से जूझती रहेगी। वे बताते हैं कि ये शक्तिशाली लोग ‘द इवेंट’ को किसी भी कारण से संभव मानते हैं — जैसे कि एआई का नियंत्रण से बाहर होना या अन्य तकनीकी और जैविक खतरों का उभरना — और इसके लिए तैयारियों में जुटे हैं।
घोष इस बात पर भी जोर देते हैं कि यह मानसिकता एक खतरनाक राजनीतिक संदेश देती है: वैश्विक मलबे में गरीब, विकेंद्रीकृत समुदायों को मरने देना और स्वयं सुरक्षित रहना। उनका तर्क है कि वास्तविक रूप से संकट का सामना वे लोग करना सीखते हैं जिन्होंने विकास-प्रधान प्रणालियों के बाहर जीवित रहना सीखा है — न कि केवल तकनीकी या आर्थिक शक्ति वाले।
इस बहस का मतलब यह भी है कि जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और वैश्विक स्वास्थ्य खतरों जैसे गहरे संकटों का सामना कर रही है, तब अमीरों की “बंकर संस्कृति” हमारे सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर प्रश्न खड़े करती है। यह एक चेतावनी है कि केवल निजी बचाव की योजना बनाने से हमारी सामूहिक चुनौतियाँ हल नहीं होंगी बल्कि उन्हें और बदतर भी कर सकती हैं।