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इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की चेतावनी: राज्यों का फिस्कल पॉपुलिज्म भारत की ग्रोथ और फिस्कल विश्वसनीयता के लिए खतरा

Economy  •  👁 14 views  •  30 Jan 2026
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की चेतावनी: राज्यों का फिस्कल पॉपुलिज्म भारत की ग्रोथ और फिस्कल विश्वसनीयता के लिए खतरा
नई दिल्ली: इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने राज्यों की वित्तीय नीतियों को लेकर एक अहम चेतावनी दी है। सर्वे के मुताबिक, फिस्कल पॉपुलिज्म और बड़े पैमाने पर कैश ट्रांसफर योजनाएं राज्यों के बजट पर दबाव बढ़ा रही हैं, जिससे विकास को बढ़ावा देने वाले पूंजीगत खर्च (Capex) में कटौती का खतरा पैदा हो रहा है। इसका सीधा असर भारत की फिस्कल क्रेडिबिलिटी यानी वित्तीय विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।
सर्वे में कहा गया है कि मुफ्त योजनाएं, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और अल्पकालिक राजनीतिक लाभ वाली घोषणाएं राज्यों के राजस्व संसाधनों को सीमित कर रही हैं। नतीजतन, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और उत्पादक क्षेत्रों में निवेश घटने की आशंका है, जो दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए बेहद जरूरी हैं।
आर्थिक सर्वे यह भी रेखांकित करता है कि कैश ट्रांसफर अपने आप में गलत नहीं हैं, लेकिन अगर वे राजस्व की स्थिरता और उत्पादक निवेश की कीमत पर किए जाते हैं, तो वे अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे से न केवल राज्यों की उधारी बढ़ेगी, बल्कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है।
सर्वे में चेताया गया है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो केंद्र और राज्यों द्वारा मिलकर बनाए गए फिस्कल कंसॉलिडेशन रोडमैप को नुकसान पहुंचेगा। इससे भारत की छवि एक अनुशासित और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में कमजोर हो सकती है, खासकर वैश्विक निवेशकों के बीच।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि राज्यों को वेलफेयर और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाना होगा। लक्षित सब्सिडी, बेहतर टैक्स कलेक्शन और पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता देकर ही टिकाऊ विकास संभव है।
संक्षेप में, इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 राज्यों को आगाह करता है कि फिस्कल पॉपुलिज्म की कीमत दीर्घकालिक विकास और फिस्कल विश्वसनीयता से चुकानी पड़ सकती है।