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‘प्रलय की तैयारी और अमीर वर्ग’: अमिताभ घोष का सवाल—यह हमारे भविष्य के बारे में क्या बताता है?

social   •   👁 36 views   •   30 Jan 2026
‘प्रलय की तैयारी और अमीर वर्ग’: अमिताभ घोष का सवाल—यह हमारे भविष्य के बारे में क्या बताता है?
नई दिल्ली: प्रसिद्ध लेखक और चिंतक अमिताभ घोष ने एक तीखा और असहज सवाल उठाया है—अगर दुनिया के सबसे अमीर लोग प्रलय (Apocalypse) की तैयारी कर रहे हैं, तो यह हमारे सामूहिक भविष्य के बारे में क्या संकेत देता है? जलवायु संकट, युद्ध, महामारी और तकनीकी अस्थिरता के दौर में यह सवाल और भी प्रासंगिक हो जाता है।
अमिताभ घोष का तर्क है कि दुनिया के कई अरबपति और कॉरपोरेट एलिट वर्ग बंकर, सुरक्षित द्वीप, निजी आपूर्ति श्रृंखलाएं और सर्वाइवल टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहे हैं। यह तैयारी केवल व्यक्तिगत सुरक्षा की नहीं, बल्कि इस बात की स्वीकृति भी है कि भविष्य असमान, अस्थिर और संभावित रूप से विनाशकारी हो सकता है। घोष के अनुसार, यह सोच अपने आप में खतरनाक है क्योंकि यह सामूहिक समाधान की बजाय व्यक्तिगत बचाव को प्राथमिकता देती है।
वे सवाल उठाते हैं कि जब संसाधन और शक्ति रखने वाले लोग समाज को बचाने की जगह खुद को बचाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आम लोगों के लिए क्या उम्मीद बचती है? यह मानसिकता लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और साझा भविष्य की भावना को कमजोर करती है।
घोष जलवायु परिवर्तन को इस बहस के केंद्र में रखते हैं। उनका कहना है कि संकट से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग, नीतिगत बदलाव और सामाजिक समानता की जरूरत है, न कि कुछ लोगों का बच निकलना। अमीरों की “एग्ज़िट स्ट्रैटेजी” यह दिखाती है कि मौजूदा विकास मॉडल टिकाऊ नहीं है और असमानता को और गहरा करता है।
संक्षेप में, अमिताभ घोष का सवाल सिर्फ अमीरों की तैयारी पर नहीं, बल्कि हमारे समय की नैतिक विफलता पर है। अगर भविष्य से निपटने का रास्ता साझा प्रयासों की बजाय निजी किलों में छिपना है, तो यह मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी है।