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केरल में लेफ्ट-कांग्रेस यात्रा टक्कर: विधानसभा चुनाव से पहले समीकरण दांव पर, LDF-UDF-BJP तीनों की किस्मत पर सवाल

Politics  •  👁 8 views  •  31 Jan 2026
केरल में लेफ्ट-कांग्रेस यात्रा टक्कर: विधानसभा चुनाव से पहले समीकरण दांव पर, LDF-UDF-BJP तीनों की किस्मत पर सवाल
केरल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है, क्योंकि सीपीआई(एम)-नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और कांग्रेस-नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) राज्यभर में राजनीतिक यात्राओं (जैसे पदयात्राएँ/रैलियाँ) निकालकर मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। यह टक्कर केवल चुनावी प्रचार नहीं बल्कि राज्य की सत्ता पर कब्ज़ा करने की निर्णायक लड़ाई है।
LDF सरकार, जो एक दशक से सत्ता में है, अपने कार्यक्रम और विकास कार्यों को यात्राओं में दिखाते हुए यह संदेश देना चाहता है कि उसने राज्य की बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है। भले ही शासन के दौरान कुछ विवाद (जैसे सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी का Allegation और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी के खिलाफ धन शोधन जांच) सामने आए हों, फिर भी LDF अपनी प्रमुख उपलब्धियों और अनुभव को चुनाव के केंद्र में रख रहा है।
वहीं UDF के लिए यह चुनाव ‘जीवन-रक्षा’ का मुकाबला है। वह पिछले दस वर्षों से विपक्ष में है और अगर वह फिर से सत्ता की कुंजी पाने में नाकाम रहा तो उसके गठबंधन की भी स्थिरता पर संकट आएगा। कांग्रेस को लोगों के बीच सरकार-विरोधी लहर को अपने पक्ष में बदलना है, लेकिन इस चुनौती का सामना करना आसान नहीं है क्योंकि उसने अभी तक कोई ऐसा मुद्दा नहीं गढ़ा है जो पूरे राज्य में व्यापक समर्थन पा सके।
तीसरी ताकत भाजपा-नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भी पीछे नहीं है। स्थानीय निकाय चुनावों में ऐतिहासिक जीत और वोट शेयर में उछाल ने उसे आत्मविश्वास दिया है, और वह अब घरेलू मुद्दों और सुरक्षा-परिवर्तन के वादों के साथ मैदान में उतर रहा है।
इस चुनाव में केरल के सामाजिक समीकरण, सैन्य पक्ष द्वारा सत्ता-संरचना पर प्रभाव, और वोट विभाजन जैसे मुद्दे निर्णायक होंगे। LDF की ‘भरोसा’ बनाम UDF का ‘बदलाव’ तथा BJP का तीसरे मोर्चे के रूप में उदय — ये सभी कारक मिलकर केरल के आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करेंगे।