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कुणाल कामरा और सीनियर वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, सहयोग पोर्टल और बदले हुए IT नियमों को रद्द करने की मांग

Politics   •   👁 42 views   •   06 Feb 2026
कुणाल कामरा और सीनियर वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, सहयोग पोर्टल और बदले हुए IT नियमों को रद्द करने की मांग
स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और एक सीनियर वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा लागू किए गए सहयोग पोर्टल और बदले हुए IT नियम भारत के लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला हैं।
कुणाल कामरा ने अदालत में दलील दी कि इन नियमों और पोर्टल के माध्यम से नागरिकों की ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर अघोषित नियंत्रण लगाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र की बुनियाद पर सीधा हमला है क्योंकि इसके जरिए आलोचनात्मक और स्वतंत्र विचारों को दबाने की कोशिश की जा सकती है।
साथ ही, सीनियर वकील ने अदालत को बताया कि IT नियमों में हाल में हुए बदलाव नागरिकों की निजता और डिजिटल अधिकारों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत सुरक्षित है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह PIL (जनहित याचिका) भारतीय लोकतंत्र में साइबर स्पेस की स्वतंत्रता और सरकार की निगरानी के बीच संतुलन बनाए रखने का मामला है। अगर हाईकोर्ट याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला करता है, तो यह डिजिटल अधिकारों और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।
कुणाल कामरा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उनका उद्देश्य केवल लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संरक्षित करना है, न कि किसी व्यक्ति या संस्थान को निशाना बनाना।
बॉम्बे हाईकोर्ट की इस याचिका पर सुनवाई जल्द ही होने की उम्मीद है। इस फैसले से न केवल डिजिटल मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की भूमिका पर असर पड़ेगा, बल्कि देश में साइबर कानून और नागरिक अधिकारों के संबंध में भी महत्वपूर्ण दिशा तय होगी।