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ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ लड़ाई को दिल्ली क्यों शिफ्ट किया? जानिए इसके पीछे की सियासी रणनीति

Politics  •  👁 19 views  •  03 Feb 2026
ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ लड़ाई को दिल्ली क्यों शिफ्ट किया? जानिए इसके पीछे की सियासी रणनीति
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ अपनी लड़ाई को दिल्ली तक ले आई हैं। ममता बनर्जी का यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि इसके पीछे एक स्पष्ट राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है।
दरअसल, ममता बनर्जी लंबे समय से खुद को बीजेपी विरोधी राजनीति के एक मजबूत चेहरे के रूप में पेश करती रही हैं। बंगाल में लगातार चुनावी जीत के बाद अब वह यह संदेश देना चाहती हैं कि उनकी लड़ाई सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र की नीतियों और फैसलों के खिलाफ भी है। दिल्ली आकर धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक बैठकों के जरिए ममता केंद्र सरकार पर सीधे दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं।
दिल्ली को चुनने की एक बड़ी वजह यह भी है कि यहां मीडिया, विपक्षी दल और राष्ट्रीय संस्थाएं मौजूद हैं। ममता बनर्जी जानती हैं कि दिल्ली से उठी आवाज पूरे देश में गूंजती है। बीजेपी पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, संघीय ढांचे को कमजोर करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने जैसे आरोपों को वह राष्ट्रीय मंच पर उठाना चाहती हैं।
इसके अलावा, ममता बनर्जी विपक्षी एकता की धुरी बनने की कोशिश में भी जुटी हैं। दिल्ली में रहकर वह कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दलों से संवाद बढ़ा रही हैं, ताकि 2024 और आगे के चुनावों में बीजेपी को एकजुट चुनौती दी जा सके। उनका मकसद खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करना है, जो बीजेपी को सीधे टक्कर दे सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता का दिल्ली आना बीजेपी के खिलाफ वैकल्पिक राजनीति का रोडमैप तैयार करने की दिशा में एक कदम है। यह लड़ाई अब केवल बंगाल बनाम बीजेपी नहीं रही, बल्कि केंद्र की राजनीति को चुनौती देने का प्रयास बन चुकी है। ममता बनर्जी का यह दांव आने वाले समय में विपक्ष की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।