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AICCTU का बड़ा दावा: नए लेबर कोड से मजदूर होंगे बिना न्यूनतम वेतन, जॉब और सोशल सुरक्षा के मोहरे

Economy   •   👁 15 views   •   04 Feb 2026
AICCTU का बड़ा दावा: नए लेबर कोड से मजदूर होंगे बिना न्यूनतम वेतन, जॉब और सोशल सुरक्षा के मोहरे
अखिल भारतीय केंद्रीय ट्रेड यूनियन (AICCTU) ने हाल ही में केंद्र सरकार के नए लेबर कोड को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। ट्रेड यूनियन का कहना है कि नए कोड के लागू होने से मजदूरों के न्यूनतम वेतन, नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे मौलिक अधिकार प्रभावित होंगे। AICCTU ने चेताया है कि इससे मजदूरों को सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में ‘मोहरे’ की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, बिना किसी कानूनी सुरक्षा के।
ट्रेड यूनियन का कहना है कि नए कोड में कई प्रावधान ऐसे हैं, जो नियोक्ताओं को मजदूरों की सेवा शर्तों में लचीलापन देते हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि मजदूरों को बिना स्थायी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के अस्थायी रोजगार पर रखा जा सकेगा। न्यूनतम वेतन की गारंटी भी कमजोर होने से मजदूरों की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ेगा।
AICCTU ने केंद्र सरकार से अपील की है कि नए कोड को लागू करने से पहले मजदूर संगठनों और ट्रेड यूनियनों की राय को पूरी तरह से शामिल किया जाए। उनका तर्क है कि मजदूरों के हितों की अनदेखी करने वाला कानून समाज में असमानता और असुरक्षा को बढ़ावा देगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नए लेबर कोड के प्रावधानों में सुधार नहीं किया गया, तो भारत में औद्योगिक विवाद और श्रमिक असंतोष बढ़ सकता है। इसके अलावा, छोटे और मझौले उद्योगों में कर्मचारियों के रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के अधिकार सीमित हो सकते हैं।
AICCTU ने चेतावनी दी है कि मजदूरों के हितों को कमजोर करने वाले किसी भी कदम का विरोध संगठित आंदोलन के जरिए किया जाएगा। उनके अनुसार, कामगारों की सुरक्षा, सम्मान और स्थायी रोजगार बनाए रखना हर लोकतांत्रिक समाज की जिम्मेदारी है।