The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 कैलाश हिल्स में ट्रैफिक समस्या पर बड़ी बैठक: Delhi Traffic Police ने दिया एक्शन का आश्वासन     🔴 युवा पीढ़ी में जिम्मेदार सड़क व्यवहार अत्यंत महत्वपूर्ण : दिनेश कुमार गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, ट्रैफिक (ज़ोन-II)     🔴 प्रो. (डॉ.) जे. एस. यादव, डीन के मार्गदर्शन में हुआ इको-ट्रेल जागरूकता भ्रमण     🔴 छात्र अपनी छुपी प्रतिभाओं को प्रदर्शित करें : प्रो. राजीव कुमार कुलगुरु     🔴 फेस्ट छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच संवाद, नेटवर्किंग और भर्ती का एक प्रभावी मंच : प्रो. वी. रविचंद्रन कुलपति     🔴 Spoton Global Group: भारत का उभरता हुआ Skill, Media और Growth Ecosystem     🔴 न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव एवं न्यायाधीश राजीव बंसल् कुशल मार्गदर्शन में किया कुल 1,20,742 यातायात चालानों का सफलतापूर्वक निस्तारण     🔴 सेल्फी का शौक या मौत को बुलावा? सड़क पर लापरवाही पड़ सकती है भारी     🔴 व्हाट्सएप हैक कर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़: बिहार शरीफ से 5 साइबर ठग गिरफ्तार     🔴 “अकोला के जावेद हिदायत पटेल बने महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस के महासचिव, जिले में खुशी की लहर”    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

कॉर्पोरेट बनाम किसान: केंद्र ने 9.87 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट लोन किए माफ, कृषि कर्ज माफी सिर्फ 1.67 लाख करोड़ तक सीमित

Economy   •   👁 19 views   •   05 Feb 2026
कॉर्पोरेट बनाम किसान: केंद्र ने 9.87 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट लोन किए माफ, कृषि कर्ज माफी सिर्फ 1.67 लाख करोड़ तक सीमित
केंद्र सरकार की कर्ज माफी नीति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने अब तक करीब 9.87 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट लोन माफ किए हैं, जबकि कृषि क्षेत्र के लिए यह आंकड़ा सिर्फ 1.67 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रहा है। इस असमानता ने किसानों, विपक्षी दलों और आर्थिक विशेषज्ञों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार का तर्क है कि कॉर्पोरेट लोन माफी दरअसल बैंकों द्वारा किए गए राइट-ऑफ हैं, ताकि बैलेंस शीट साफ की जा सके और बैंक दोबारा कर्ज देने की स्थिति में आ सकें। लेकिन आलोचकों का कहना है कि चाहे इसे तकनीकी रूप से राइट-ऑफ कहा जाए या माफी, इसका फायदा बड़े उद्योगपतियों को मिलता है, जबकि कर्ज में डूबे किसान आज भी आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की भूमिका बेहद अहम है। देश की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है, लेकिन किसानों को मिलने वाली राहत नाकाफी मानी जा रही है। फसल खराब होने, न्यूनतम समर्थन मूल्य, महंगाई और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के बीच सीमित कृषि कर्ज माफी किसानों की परेशानियों को कम नहीं कर पा रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार कॉर्पोरेट सेक्टर को आर्थिक स्थिरता के नाम पर इतनी बड़ी राहत दे सकती है, तो किसानों के लिए भी दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान जरूरी है। इसमें सिर्फ कर्ज माफी नहीं, बल्कि सिंचाई, बीमा, बाजार तक पहुंच और आय की गारंटी जैसे कदम शामिल होने चाहिए।
यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से भी जुड़ा है। सवाल यही है कि क्या विकास का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें बड़े उद्योग सुरक्षित हों, लेकिन अन्नदाता असुरक्षित? आने वाले समय में यह बहस और तेज होने की संभावना है, खासकर जब किसान आंदोलन और ग्रामीण संकट लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।