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‘किसी भी समुदाय को पहला सम्मान नहीं’: बड़े त्योहार से पहले मद्रास हाई कोर्ट ने मदुरै मंदिरों में भेदभाव पर लगाई रोक

National  •  👁 7 views  •  05 Feb 2026
‘किसी भी समुदाय को पहला सम्मान नहीं’: बड़े त्योहार से पहले मद्रास हाई कोर्ट ने मदुरै मंदिरों में भेदभाव पर लगाई रोक
मद्रास हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी भी समुदाय को ‘पहला सम्मान’ (First Honour) देने की परंपरा स्वीकार्य नहीं है और इससे धार्मिक आयोजनों में भेदभाव को बढ़ावा मिलता है। यह आदेश मदुरै के मंदिरों में होने वाले बड़े वार्षिक त्योहारों से ठीक पहले आया है, जिससे प्रशासन और मंदिर प्रबंधन को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल गए हैं।
कोर्ट ने कहा कि मंदिर उत्सवों के दौरान किसी विशेष जाति या समुदाय को प्राथमिकता देना संविधान में निहित समानता के अधिकार का उल्लंघन है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों में भागीदारी सभी भक्तों के लिए समान होनी चाहिए और परंपरा के नाम पर भेदभाव को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
यह मामला मदुरै के कुछ मंदिरों में त्योहारों के दौरान ‘पहला सम्मान’ देने की प्रथा को लेकर दायर याचिकाओं से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस परंपरा के कारण अन्य समुदायों को अपमान और बहिष्कार का सामना करना पड़ता है, जिससे सामाजिक तनाव पैदा होता है।
मद्रास हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि आगामी त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी समूह द्वारा जबरन विशेष सम्मान की मांग की जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला तमिलनाडु में मंदिर प्रशासन और धार्मिक आयोजनों के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है। इससे न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि धार्मिक स्थलों को विवाद से दूर रखने में भी मदद मिलेगी।
स्थानीय प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का पालन करने का भरोसा दिलाया है और कहा है कि त्योहारों के दौरान सभी समुदायों की समान भागीदारी और सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा।
मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि धार्मिक परंपराएं संविधान से ऊपर नहीं हो सकतीं और बराबरी व समावेशन ही लोकतांत्रिक समाज की नींव हैं।