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ईमानदारी की जीत: ठेकेदार को 6% ब्याज सहित भुगतान का हाईकोर्ट आदेश — एडवोकेट तौसीफ नियाजी की दमदार पैरवी से ऐतिहासिक फैसला

Crime  •  👁 22 views  •  04 Mar 2026
ईमानदारी की जीत: ठेकेदार को 6% ब्याज सहित भुगतान का हाईकोर्ट आदेश — एडवोकेट तौसीफ नियाजी की दमदार पैरवी से ऐतिहासिक फैसला
अवेस सिद्दीकी | अकोला | विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र में ठेकेदारों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के बीच अकोला से एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सामने आया है, जिसने न केवल एक ठेकेदार को न्याय दिलाया, बल्कि सिस्टम में बैठे भ्रष्ट तत्वों को भी करारा जवाब दिया।

यह मामला Akola City Municipal Corporation और स्थानीय सिविल ठेकेदार शोएब अबूबकर सोराठिया के बीच भुगतान विवाद का था। ठेकेदार ने वर्ष 2016 में निगम द्वारा दिए गए सीमेंट रोड व ड्रेनेज निर्माण कार्य को पूर्ण किया था। कुल ₹5,97,947/- का बिल बकाया था।

क्या था विवाद?
नगर निगम ने काम पूरा होने और माप पुस्तिका (Measurement Book) में एंट्री होने के बावजूद भुगतान रोक दिया। इतना ही नहीं, ठेकेदार पर पुराने कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाकर ब्लैकलिस्ट कर दिया और पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई।

ठेकेदार का आरोप था कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की नीयत के कारण वैध भुगतान रोका गया।

सिविल कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (2022)

4th Joint Civil Judge Senior Division, Akola ने 02 मई 2022 को दिए अपने निर्णय में स्पष्ट कहा:

ठेकेदार ने कार्य पूरा किया है।

बिना पूर्व नोटिस भुगतान रोकना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

निगम ₹5,97,947/- की राशि 6% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे।


कोर्ट ने माना कि निगम के गवाहों की जिरह में यह स्वीकार हुआ कि कार्य पूर्ण होने के बाद ही बिल पास हुए थे।


सेशन कोर्ट और फिर हाईकोर्ट में हार

नगर निगम ने फैसले को चुनौती दी, परंतु अपील खारिज हो गई। इसके बाद हाईकोर्ट में द्वितीय अपील दायर की गई, जिसे जनवरी 2026 में खारिज कर दिया गया।

अंततः 3rd Joint Civil Judge Senior Division, Akola ने 11 फरवरी 2026 को आदेश जारी करते हुए ₹8,15,424/- (मूलधन + ब्याज) की राशि ठेकेदार के खाते में NEFT/ECS से ट्रांसफर करने का निर्देश दिया।



एडवोकेट तौसीफ नियाजी — बने न्याय के नायक

इस पूरे मामले में एडवोकेट तौसीफ नियाजी की दमदार और तथ्यपरक पैरवी निर्णायक साबित हुई। उन्होंने अदालत के सामने यह सिद्ध किया कि:

भुगतान रोका जाना दुर्भावनापूर्ण था।

बिना उचित प्रक्रिया के ब्लैकलिस्ट करना गैरकानूनी है।

सार्वजनिक संस्था होने के बावजूद निगम मनमानी नहीं कर सकता।


उनकी कानूनी रणनीति, दस्तावेजी साक्ष्य और जिरह ने केस की दिशा बदल दी। यह जीत न केवल एक व्यक्ति की, बल्कि पूरे ठेकेदार समुदाय की जीत मानी जा रही है।


क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक?
पहली बार स्पष्ट संदेश: “काम पूरा, तो भुगतान ज़रूरी”

निगम जैसी संस्थाओं को न्यायिक चेतावनी

ठेकेदारों के आत्मविश्वास में वृद्धि

6% ब्याज के साथ भुगतान — देरी पर आर्थिक दंड


यह निर्णय बताता है कि यदि ठेकेदार ईमानदारी से कार्य करे और कानूनी लड़ाई लड़ने का साहस रखे, तो न्याय अवश्य मिलता है।


निष्कर्ष

अकोला की इस कानूनी लड़ाई ने यह सिद्ध कर दिया कि सत्ता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अदालत में सत्य और साक्ष्य ही सर्वोपरि होते हैं। एडवोकेट तौसीफ नियाजी की यह जीत आने वाले समय में उन सभी ठेकेदारों के लिए प्रेरणा बनेगी जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस रखते हैं।