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गुरबाणी आध्यात्मिक संपदा का स्रोत : डॉ. मनप्रीत सिंह सम्पादक

Education   •   👁 20 views   •   18 Apr 2026
गुरबाणी आध्यात्मिक संपदा का स्रोत : डॉ. मनप्रीत सिंह सम्पादक
Vijay Gaur Channel Head - Delhi

(माता सुंदरी कॉलेज में 'गुरबाणी: युवाओं के लिए मार्गदर्शक प्रकाश'पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शानदार आयोजन )

माता सुंदरी महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा 'द सिख रिव्यू' के सहयोग से 17 अप्रैल 2026 को "गुरबाणी: युवाओं के लिए मार्गदर्शक प्रकाश" विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य आधुनिक परिवेश में युवाओं के व्यक्तिगत विकास, मानसिक शांति और नैतिक मूल्यों के निर्माण में गुरबाणी की भूमिका को समझना था। कार्यक्रम का शुभारंभ माता गुजरी हॉल में डिविनिटी सोसाइटी द्वारा की गई प्रार्थना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. हर्षमीत कौर ने वर्तमान समय की अनिश्चितताओं और युद्ध जैसी स्थितियों से उत्पन्न होने वाली चिंताओं पर चर्चा करते हुए बताया कि 'नाम सिमरन' किस प्रकार एक अशांत मन को स्थिरता प्रदान कर सकता है। 'शीश गंज' पत्रिका के संपादक डॉ. मनप्रीत सिंह ने गुरबाणी को आध्यात्मिक संपदा का स्रोत बताया जो व्यक्ति के कठोर शब्दों को भी सौम्य अभिव्यक्ति में बदल देती है। अमेरिका से आए शोधकर्ता डॉ. जसवंत सिंह ने भी गुरबाणी की वैश्विक प्रासंगिकता पर बल देते हुए युवाओं को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं का अनुसरण करने हेतु प्रोत्साहित किया।
​संगोष्ठी के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने गुरबाणी के विविध पहलुओं पर मंथन किया, जिसमें आत्म-जागरूकता, भावनात्मक उपचार और डिजिटल युग में अहंकार से मुक्ति जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण जागरूकता और 'लंगर, संगत एवं पंगत' जैसे सिख सिद्धांतों के माध्यम से सामाजिक समानता स्थापित करने पर भी जोर दिया। संगोष्ठी में दैनिक जीवन में प्रेम, संतोष, नैतिक नेतृत्व और शैक्षणिक अखंडता जैसे मूल्यों को अपनाने की व्यावहारिक पद्धतियों पर भी प्रकाश डाला गया। विशिष्ट अतिथि सत्र के दौरान सेवानिवृत्त डीआईजी एस. प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अत्यधिक प्रभाव के बीच आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता जताई। जर्मनी से आए एस. लखिंदर सिंह ने 'किरत करो' के सिद्धांत के माध्यम से ईमानदारी की कमाई और कड़ी मेहनत की महत्ता बताई। डॉ. मनप्रीत सिंह ने 1984 की त्रासदी के ऐतिहासिक महत्व और बाबा फरीद जी की वाणी की प्रासंगिकता पर विचार रखे।
​महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हरप्रीत कौर ने सभी विशिष्ट अतिथियों और शोधकर्ताओं का अभिनंदन करते हुए विद्यार्थियों में बढ़ रहे अवसाद और चिंता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि गुरबाणी युवाओं के लिए एक ऐसे मार्गदर्शक प्रकाश के समान है जो उन्हें आधुनिक चुनौतियों से निपटने की शक्ति प्रदान करती है, साथ ही उन्होंने छात्रों को उपलब्ध प्रचुर गुरबाणी साहित्य को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। समापन सत्र का संचालन सुश्री विंद्री कौर सूरी द्वारा किया गया, जिन्होंने शिक्षा और आध्यात्मिकता के समन्वय से युवा सशक्तिकरण पर अपना व्याख्यान दिया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और आयोजन समिति द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ इस सफल अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ।