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कोई दखल नहीं: केरल हाई कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट को प्राइवेट कॉलेज के चेतावनी पत्र को रद्द करने से क्यों इनकार कर दिया

law  •  👁 8 views  •  20 Jan 2026
कोई दखल नहीं: केरल हाई कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट को प्राइवेट कॉलेज के चेतावनी पत्र को रद्द करने से क्यों इनकार कर दिया
केरल हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में प्राइवेट लॉ कॉलेज द्वारा जारी किए गए चेतावनी पत्र (Warning Letter) को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों के आंतरिक अनुशासनात्मक मामलों में न्यायालय को तभी हस्तक्षेप करना चाहिए, जब कोई गंभीर कानूनी उल्लंघन या मनमानी सामने आए।
मामले के अनुसार, एक लॉ स्टूडेंट ने अपने कॉलेज द्वारा जारी चेतावनी पत्र को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। छात्र का तर्क था कि कॉलेज प्रशासन ने बिना उचित कारण और प्रक्रिया के उसे चेतावनी पत्र जारी किया, जिससे उसकी शैक्षणिक और भविष्य की संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। छात्र ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
वहीं कॉलेज प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि चेतावनी पत्र छात्र के व्यवहार और कॉलेज के आचार संहिता (Code of Conduct) के उल्लंघन के आधार पर जारी किया गया था। कॉलेज ने यह भी कहा कि यह एक प्रारंभिक अनुशासनात्मक कदम है, न कि कोई कठोर सजा, और इसका उद्देश्य छात्र को भविष्य में अनुशासन बनाए रखने के लिए सचेत करना है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद केरल हाई कोर्ट ने कहा कि चेतावनी पत्र जारी करना कॉलेज का आंतरिक प्रशासनिक निर्णय है। जब तक यह साबित न हो कि निर्णय पूरी तरह मनमाना, दुर्भावनापूर्ण या कानून के विपरीत है, तब तक अदालत इसमें दखल नहीं दे सकती। कोर्ट ने यह भी माना कि चेतावनी पत्र अपने आप में छात्र के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन नहीं करता।
अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अनुशासन बनाए रखने के लिए उचित स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, जहां छात्र कॉलेज के आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई को अदालत में चुनौती देते हैं।