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3 साल में TV और डिजिटल न्यूज़ रेगुलेटर के 60% आदेशों में सांप्रदायिक कोड उल्लंघन, मीडिया की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

social  •  👁 12 views  •  22 Jan 2026
3 साल में TV और डिजिटल न्यूज़ रेगुलेटर के 60% आदेशों में सांप्रदायिक कोड उल्लंघन, मीडिया की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
पिछले तीन वर्षों के आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत में टेलीविज़न और डिजिटल न्यूज़ मीडिया को नियंत्रित करने वाले रेगुलेटरी निकायों के आदेशों में सांप्रदायिक कोड के उल्लंघन का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस अवधि में जारी किए गए कुल आदेशों में से लगभग 60 प्रतिशत मामलों में सांप्रदायिक आचार संहिता के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। यह स्थिति मीडिया की जिम्मेदारी, निष्पक्षता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
रेगुलेटरी संस्थाएं—जैसे कि न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़े स्व-नियामक संगठन—अक्सर उन कार्यक्रमों और खबरों पर कार्रवाई करते हैं, जिनमें धार्मिक समुदायों को लेकर भड़काऊ भाषा, पक्षपातपूर्ण प्रस्तुति या अपुष्ट दावे किए जाते हैं। इन आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि इस तरह की सामग्री न केवल पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि सामाजिक तनाव और विभाजन को भी बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टीआरपी और क्लिकबेट की दौड़ में कुछ मीडिया संस्थान सनसनीखेज़ कंटेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं। डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स के तेज़ी से बढ़ने के साथ यह चुनौती और भी जटिल हो गई है, क्योंकि ऑनलाइन सामग्री का प्रसार बहुत तेज़ होता है और उसका असर व्यापक स्तर पर पड़ता है। ऐसे में रेगुलेटरी आदेशों की संख्या बढ़ना इस बात का संकेत है कि निगरानी की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक है।

मीडिया विश्लेषकों का कहना है कि सांप्रदायिक कोड का पालन केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी आवश्यकता है। निष्पक्ष, संतुलित और तथ्यपरक रिपोर्टिंग से ही मीडिया जनता का विश्वास बनाए रख सकता है। रेगुलेटरों के ये आदेश एक चेतावनी की तरह हैं कि अगर आत्म-नियमन को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो सख्त नियमों और बाहरी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ सकती है।

कुल मिलाकर, पिछले तीन वर्षों में सामने आए ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारतीय न्यूज़ मीडिया को आत्ममंथन करने और जिम्मेदार पत्रकारिता की ओर लौटने की सख्त ज़रूरत है।