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एग्रेसिव ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित 78 वर्षीय महिला की न सर्जरी संभव थी, न कीमोथेरेपी: डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

Health  •  👁 18 views  •  23 Jan 2026
एग्रेसिव ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित 78 वर्षीय महिला की न सर्जरी संभव थी, न कीमोथेरेपी: डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान
एग्रेसिव ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही 78 साल की एक बुज़ुर्ग महिला के इलाज की कहानी आधुनिक चिकित्सा और डॉक्टरों की सूझबूझ का अहम उदाहरण बनकर सामने आई है। महिला की उम्र और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण न तो सर्जरी संभव थी और न ही कीमोथेरेपी देना सुरक्षित माना गया। ऐसे में डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी जान बचाने की थी।
डॉक्टरों के अनुसार, मरीज की शारीरिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पारंपरिक कैंसर उपचार से जान को खतरा हो सकता था। कीमोथेरेपी के गंभीर साइड इफेक्ट्स और सर्जरी के जोखिम को देखते हुए मेडिकल टीम ने एक वैकल्पिक और व्यक्तिगत इलाज रणनीति अपनाने का फैसला किया।
इस विशेष उपचार योजना के तहत डॉक्टरों ने टार्गेटेड थेरेपी और हार्मोन-आधारित इलाज जैसे विकल्पों पर ध्यान केंद्रित किया। इन उपचारों का उद्देश्य कैंसर की बढ़त को रोकना था, बिना मरीज के शरीर पर अत्यधिक दबाव डाले। नियमित निगरानी, सीमित डोज़ में दवाएं और मल्टी-डिसिप्लिनरी मेडिकल टीम की सलाह से इलाज को आगे बढ़ाया गया।
इलाज के दौरान महिला की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा गया। कैंसर की प्रगति को नियंत्रित किया गया और उसकी जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि बुज़ुर्ग मरीजों के मामले में सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि उनकी संपूर्ण सेहत को ध्यान में रखकर निर्णय लेना बेहद जरूरी होता है।
यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि हर कैंसर मरीज के लिए एक ही इलाज उपयुक्त नहीं होता। सही मेडिकल आकलन, वैकल्पिक उपचार और समय पर निर्णय से उन मरीजों की भी जान बचाई जा सकती है, जिनके लिए पारंपरिक इलाज संभव नहीं होता।