The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 ‘उनसे पूछो… अल-इत्तिहाद के खिलाड़ियों से पूछो’: पूर्व क्लब को अलविदा न कहने पर करीम बेंजेमा का करारा जवाब     🔴 मध्य प्रदेश 2026 में 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आयोजित करेगी     🔴 जापान ने पर्यटकों के बुरे व्यवहार के कारण माउंट फ़ूजी चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल रद्द किया     🔴 RBI ने MSMEs के लिए बिना गारंटी वाले लोन की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया     🔴 RBI ने ग्राहकों को छोटे फ्रॉड से बचाने के लिए तय की 25,000 रुपये की मुआवज़े की सीमा     🔴 हाईकोर्ट ने रिश्वत मांगने वाले वकील को जमानत देने से किया इनकार, कहा – 'अपमानजनक हरकत'     🔴 “कर्नाटक कैबिनेट ने GBA क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 42 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंज़ूरी दी”     🔴 चेल्सी के बॉस लियाम रोज़ेनियर ने आर्सेनल के खिलाफ गुस्से की वजह बताई: 'फुटबॉल में कुछ तौर-तरीके होते हैं'     🔴 जिम्मेदारी लें: HERizon Care के साथ सर्वाइकल कैंसर से बचाव करें     🔴 टेक-इनेबल्ड गुड्स ट्रांसपोर्टेशन MSMEs के लिए लॉजिस्टिक्स लागत कम करती हैं: C-DEP-IIT दिल्ली स्टडी    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

“‘अन्यायपूर्ण, अभूतपूर्व’: तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा एक ही याचिका में कई राहत की अपील खारिज करने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता”

law  •  👁 7 views  •  27 Jan 2026
“‘अन्यायपूर्ण, अभूतपूर्व’: तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा एक ही याचिका में कई राहत की अपील खारिज करने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता”
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के एक फैसले पर चिंता जताई है, जिसमें एक ही याचिका में कई अलग-अलग राहत की अपीलों को खारिज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस कदम को “अन्यायपूर्ण और अभूतपूर्व” करार देते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में इस तरह का रुख उचित नहीं माना जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि में याचिकाकर्ता ने एक ही याचिका के माध्यम से कई मुद्दों और राहत की मांगें कोर्ट में रखी थीं। हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते समय सभी मांगों को एक साथ अस्वीकार कर दिया, जिससे याचिकाकर्ता के अधिकारों और न्यायिक जांच के अवसर पर सवाल उठे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उच्च न्यायालयों को प्रत्येक मामले की स्वतंत्रता और तथ्यात्मक स्थिति के आधार पर निर्णय करना चाहिए। एक ही याचिका में उठाए गए अलग-अलग मुद्दों को नजरअंदाज कर देना न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के खिलाफ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के निर्णय याचिकाकर्ताओं के कानूनी अधिकारों और न्याय तक पहुँच को बाधित कर सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और समग्र न्याय के महत्व को रेखांकित करती है। यह मामला अन्य हाई कोर्ट्स के लिए भी संकेत देता है कि याचिकाओं का निष्पादन तथ्यों और कानूनी तर्कों के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल प्रक्रिया की सख्ती के आधार पर।
अब सुप्रीम कोर्ट मामले को सुनवाई के लिए आगे बढ़ाएगी और हाई कोर्ट के फैसले की समीक्षा करेगी। इससे न केवल याचिकाकर्ता को न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी, बल्कि न्यायालयों के फैसले लेने के तरीके पर भी मार्गदर्शन मिलेगा।