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12 लाख रुपये रॉयल्टी बनाम 96 करोड़ रुपये जुर्माना: ओडिशा हाई कोर्ट ने NGT के आदेश को रद्द किया

law  •  👁 14 views  •  28 Jan 2026
12 लाख रुपये रॉयल्टी बनाम 96 करोड़ रुपये जुर्माना: ओडिशा हाई कोर्ट ने NGT के आदेश को रद्द किया
भुवनेश्वर: ओडिशा हाई कोर्ट ने हाल ही में एनजीटी (National Green Tribunal) के ‘पूरी तरह मनमाने’ आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कंपनी पर 96 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया था। इस मामले में कोर्ट ने यह साफ किया कि एनजीटी का निर्णय न तो संतुलित था और न ही कानूनी रूप से सही।
मामला एक खनन कंपनी और पर्यावरण शुल्क से जुड़ा था। एनजीटी ने प्रारंभिक रूप से कंपनी पर बहुत अधिक जुर्माना लगाया, जबकि वास्तविक रॉयल्टी राशि केवल 12 लाख रुपये थी। हाई कोर्ट ने कहा कि जुर्माना और रॉयल्टी के बीच अंतर इतना बड़ा था कि इसे मनमाना और अनुचित माना जा सकता है।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि कंपनियों के खिलाफ पर्यावरणीय जुर्माने में उचित न्यायसंगत प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है। न्यायाधीशों ने कहा कि “अत्यधिक जुर्माना न केवल आर्थिक रूप से न्यायोचित नहीं है, बल्कि यह कानूनी आधारहीन भी प्रतीत होता है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण और उद्योग हितों के बीच संतुलन की अहमियत को दर्शाता है। न्यायिक समीक्षा यह सुनिश्चित करती है कि कानून के दायरे में रहकर, उचित और निष्पक्ष जुर्माने लगाए जाएँ।
ओडिशा हाई कोर्ट के इस फैसले से खनन और औद्योगिक कंपनियों के लिए यह स्पष्ट संदेश गया है कि पर्यावरण संरक्षण कानून का पालन आवश्यक है, लेकिन अनुचित और अत्यधिक जुर्माने से बचना भी न्यायसंगत प्रक्रिया का हिस्सा है।
इस फैसले ने न केवल NGT के आदेश की समीक्षा की, बल्कि कंपनियों और पर्यावरण नियामक संस्थाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मिसाल कायम की है।