The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 माता सुंदरी महिला महाविद्यालय में वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव ‘सारंग 2026’ का सफल आयोजन     🔴 Spoton Global Group के भव्य समारोह में 100+ छात्राओं का सम्मान, ‘आत्मनिर्भर महिला’ अभियान को मिली नई दिशा     🔴 दिल्लीफार्मास्युटिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमियों हेतुउद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम हुआ आयोजित     🔴 विश्वविद्यालय का उद्देश्य खिलाड़ियों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है : अशोक कुमार कुलपति     🔴 दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) की पहल: डिजिटल लोक अदालत से ट्रैफिक चालान निस्तारण हुआ आसान और पारदर्शी     🔴 एकंगरसराय में दर्दनाक हादसा: रेलवे ट्रैक पर मालगाड़ी की चपेट में आने से युवक की मौत     🔴 इस्लामपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: विशेष अभियान में दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए     🔴 वैलेंटाइन डे विवाद: युवक-युवती को अलग कर हाथ में थमाई हनुमान चालीसा, तस्वीर वायरल     🔴 बिहार के नालंदा में युवक की आत्महत्या: दीपनगर इलाके से दुखद घटना     🔴 दिल्ली में वैलेंटाइन डे पर सनसनी: विश्वास नगर के संतोष रेजिडेंसी होटल से युवती ने लगाई छलांग, हालत स्थिर    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

केरल के बाद कर्नाटक ने भी सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को OPD सेवाओं तक सीमित किया

Health  •  👁 14 views  •  28 Jan 2026
केरल के बाद कर्नाटक ने भी सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को OPD सेवाओं तक सीमित किया
कर्नाटक सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को केवल आउट-पेशेंट (OPD) सेवाओं तक सीमित कर दिया है। यह कदम केरल सरकार के पहले से लागू मॉडल की तर्ज पर उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।
नए निर्देशों के अनुसार, सरकारी डॉक्टर अब निजी तौर पर इन-पेशेंट (IPD) सेवाएं, सर्जरी या भर्ती से जुड़ा इलाज नहीं कर सकेंगे। वे केवल परामर्श आधारित OPD सेवाएं ही निजी स्तर पर दे पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे डॉक्टरों की प्राथमिकता सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल पर केंद्रित रहेगी।
सरकार का कहना है कि कई मामलों में शिकायतें मिली थीं कि सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस के कारण अस्पताल में पूरा समय नहीं दे पा रहे थे, जिससे आम मरीजों को परेशानी हो रही थी। इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, डॉक्टरों के कुछ संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्राइवेट प्रैक्टिस पर सीमाएं लगाने से डॉक्टरों की आय पर असर पड़ेगा और इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में असंतोष पैदा हो सकता है। वहीं, मरीज संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस नीति को सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया गया, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत कर सकती है। केरल मॉडल के अनुभव को देखते हुए कर्नाटक सरकार को इससे सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
संक्षेप में, कर्नाटक का यह फैसला सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम माना जा रहा है।