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बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति का संसद में संबोधन: संविधान क्या कहता है?

National   •   👁 22 views   •   29 Jan 2026
बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति का संसद में संबोधन: संविधान क्या कहता है?
नई दिल्ली। भारत में संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले राष्ट्रपति का संबोधन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जो संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के संयुक्त सत्र में होता है। इसे संविधान के अनुच्छेद 87 और अनुच्छेद 86 के तहत सुनिश्चित किया गया है।
राष्ट्रपति का यह संबोधन संसद के सामने वर्ष की प्राथमिक नीतियों, सरकार की योजनाओं और आर्थिक दिशा-निर्देशों को प्रस्तुत करने का अवसर होता है। संविधान के अनुच्छेद 87 के अनुसार, राष्ट्रपति संसद के सत्र के प्रारंभ में या आवश्यकतानुसार किसी अन्य समय पर दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में भाषण दे सकते हैं। यह भाषण सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को जनता और सांसदों के सामने स्पष्ट करता है।
अनुच्छेद 86 के अनुसार, राष्ट्रपति अपने संबोधन में संसद के किसी भी सदस्य से प्रश्नों का उत्तर देने की अपेक्षा नहीं रखते। इसके बाद प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्री संसद में सरकार की योजनाओं और नीतियों पर चर्चा करते हैं। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति का यह भाषण केवल औपचारिक नहीं होता, बल्कि इसमें सरकार के आगामी सत्र में पेश किए जाने वाले विधेयकों और आर्थिक नीतियों का भी संकेत मिलता है। बजट सत्र में संसद इसी भाषण को आधार मानकर वित्तीय और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करती है।
कुल मिलाकर, बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति का संबोधन भारतीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक परंपरा है। यह न केवल सरकार की प्राथमिकताओं और नीतियों की जानकारी देता है, बल्कि संसद और जनता के बीच संवाद का भी एक माध्यम है। संविधान ने इसे सुनिश्चित कर सरकार और विधायिका के बीच संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखने का अवसर प्रदान किया है।