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'पूरी तरह गैर-कानूनी': अपील अवधि से पहले ज़मीन रिकॉर्ड बदलने पर कर्नाटक हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

National   •   👁 23 views   •   29 Jan 2026
'पूरी तरह गैर-कानूनी': अपील अवधि से पहले ज़मीन रिकॉर्ड बदलने पर कर्नाटक हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में तहसीलदार द्वारा अपील की निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले ज़मीन के रिकॉर्ड में बदलाव किए जाने को “पूरी तरह गैर-कानूनी” करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई न केवल कानून के स्थापित सिद्धांतों का उल्लंघन है, बल्कि इससे नागरिकों के अधिकारों को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है।
यह मामला उस स्थिति से जुड़ा है, जहां एक प्रशासनिक आदेश के खिलाफ अपील दायर किए जाने की वैधानिक समय-सीमा अभी समाप्त नहीं हुई थी, लेकिन उससे पहले ही तहसीलदार ने भूमि रिकॉर्ड में संशोधन कर दिया। याचिकाकर्ता ने इस कदम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अपील की अवधि का उद्देश्य प्रभावित पक्ष को न्याय पाने का अवसर देना है। जब तक यह अवधि पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी निचली प्रशासनिक इकाई को रिकॉर्ड में बदलाव करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की जल्दबाज़ी प्रशासनिक अनुशासन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि भूमि रिकॉर्ड जैसे संवेदनशील मामलों में अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि इससे संपत्ति अधिकार, कानूनी विवाद और सामाजिक शांति सीधे तौर पर प्रभावित होती है। कोर्ट ने तहसीलदार की कार्रवाई को रद्द करते हुए पूर्व स्थिति बहाल करने के निर्देश दिए।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे देश में भूमि प्रशासन से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जाएगा। इससे यह संदेश जाता है कि प्रशासनिक अधिकारियों को कानून की प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करना होगा और किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह निर्णय भूमि विवादों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।