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गुजरात में टाइगर की वापसी: सरकार कैसे सुनिश्चित कर रही है कि वह राज्य में बने रहे?

National  •  👁 9 views  •  30 Jan 2026
गुजरात में टाइगर की वापसी: सरकार कैसे सुनिश्चित कर रही है कि वह राज्य में बने रहे?
गुजरात के रतनमहल वाइल्डलाइफ सेंचुरी में एक बाघ की लगातार मौजूदगी ने 32 साल बाद राज्य को फिर से ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा दिलाया है। यह राष्ट्रीय बाघ संवेदनशीलता और वन्यजीव संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गुजरात वन्यजीव संरक्षण को गंभीरता से ले रहा है।
प्रदेश सरकार और वन विभाग ने बाघ के दीर्घकालिक निवास को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सबसे पहले, रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में बाघ की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। कैमरा ट्रैप और पैट्रोल टीमों के जरिए उसकी हर गतिविधि रिकॉर्ड की जा रही है, ताकि उसके क्षेत्र में किसी भी खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।
इसके अलावा, घर में पर्याप्त शिकार और भोजन उपलब्ध कराने के लिए शिकार प्रजातियों का संरक्षण और संख्या बढ़ाना भी प्राथमिकता बनी हुई है। वन विभाग ने क्षेत्र में हिरण, नीलगाय जैसी प्री‑डेटरो प्रजातियों को संतुलित रखने के लिए प्रयास तेज़ कर दिए हैं ताकि बाघ को प्राकृतिक भोजन मिल सके और वह जंगल में ही सुरक्षित रहे।
गुजरात सरकार ने नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (NTCA) को भी स्थिति की बारीकी से सूचित किया है और उसके दिशानिर्देशों के अनुसार कदम उठा रही है। राज्यों के साथ समन्वय, तकनीकी सहायता और विशेषज्ञों की भागीदारी से यह सुनिश्चत हो रहा है कि बाघ का आवास स्थिर रहे और वह फर्क‑फर्के स्थायी निवास की ओर बढ़े।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह वापसी गुजरात में बाघ संरक्षण की क्षमता को दर्शाती है और एक सकारात्मक संकेत है कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र अब बाघ जैसे बड़े शिकारी के समर्थन में सक्षम है। इस दिशा में जारी कदमों से उम्मीद है कि समय के साथ बाघों की संख्या और उनकी जीवन‑शैली में और सुधार आएगा।