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12 साल से ‘क्लीनिकली डेड’ गुरु और फलता-फूलता डेरा: पंजाब का रहस्यमय मामला

National  •  👁 20 views  •  30 Jan 2026
12 साल से ‘क्लीनिकली डेड’ गुरु और फलता-फूलता डेरा: पंजाब का रहस्यमय मामला
चंडीगढ़: पंजाब में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने आस्था, प्रशासन और कानून—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक डेरा प्रमुख पिछले 12 वर्षों से ‘क्लीनिकली डेड’ हैं, इसके बावजूद उनका डेरा न केवल सक्रिय है, बल्कि लगातार फैलता और फलता-फूलता जा रहा है। इस विरोधाभास ने राज्य में नई बहस छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, चिकित्सकीय रिकॉर्ड्स में संबंधित गुरु को वर्षों पहले क्लीनिकली डेड घोषित किया गया था। बावजूद इसके, डेरा प्रबंधन की ओर से सार्वजनिक कार्यक्रम, चढ़ावे की व्यवस्था, संपत्ति लेन-देन और अनुयायियों की बड़ी भीड़ आज भी देखी जाती है। डेरा परिसर में गुरु की उपस्थिति का प्रतीकात्मक प्रदर्शन, प्रवचन रिकॉर्डिंग्स और ‘आशीर्वाद’ की व्यवस्थाएं जारी रहने के दावे किए जा रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि यह पूरा ढांचा आस्था के नाम पर आर्थिक और सामाजिक प्रभाव बनाए रखने का माध्यम बन गया है। वे सवाल उठाते हैं कि यदि गुरु वास्तव में जीवित नहीं हैं, तो डेरा किस कानूनी हैसियत से संचालित हो रहा है? वहीं, डेरा समर्थक इसे आध्यात्मिक परंपरा बताते हुए कहते हैं कि गुरु की “आत्मिक उपस्थिति” अनुयायियों का मार्गदर्शन करती है।
प्रशासनिक स्तर पर मामला जांच के दायरे में बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित विभाग मेडिकल दस्तावेज़, ट्रस्ट डीड, आय-व्यय विवरण और संपत्ति रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो धोखाधड़ी, गलत बयानी और वित्तीय अनियमितताओं जैसे पहलू सामने आ सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं। यदि किसी संस्था ने तथ्य छुपाकर लाभ उठाया है, तो कार्रवाई तय है।
संक्षेप में, 12 साल से ‘क्लीनिकली डेड’ बताए जा रहे गुरु और सक्रिय डेरा का यह मामला विश्वास बनाम जवाबदेही की बहस को तेज़ करता है। अब सबकी निगाहें जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।