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राइटर कॉर्नर: श्रुति राव ने युवा दर्शकों को एंगेज करने की कला साझा की — ‘बच्चों को यह नहीं बता सकते कि उन्हें क्या सोचना है’

National  •  👁 14 views  •  03 Feb 2026
राइटर कॉर्नर: श्रुति राव ने युवा दर्शकों को एंगेज करने की कला साझा की — ‘बच्चों को यह नहीं बता सकते कि उन्हें क्या सोचना है’
लेखक और युवा साहित्यकार श्रुति राव ने हाल ही में आयोजित ‘राइटर कॉर्नर’ सत्र में बच्चों और किशोरों के लिए लिखने की कला पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि युवा पाठकों को जोड़ने के लिए लेखक को उनकी स्वतंत्र सोच का सम्मान करना चाहिए। “बच्चों को यह नहीं बता सकते कि उन्हें क्या सोचना है,” श्रुति राव ने स्पष्ट किया।
सत्र में उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए कहानी लिखना केवल शब्दों को जोड़ने की प्रक्रिया नहीं है। यह एक संवाद और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया है। युवा पाठक जिज्ञासु, संवेदनशील और बहुत ही संवेदनशील होते हैं। इसलिए लेखक का काम होता है कि वह उन्हें सोचने, महसूस करने और सवाल करने के लिए प्रेरित करे, बजाय यह बताने के कि उन्हें क्या मानना चाहिए।
श्रुति राव ने उदाहरण के तौर पर अपनी कुछ किताबों और कहानियों का ज़िक्र किया, जहां उन्होंने पात्रों की जटिलताओं और विविध दृष्टिकोणों को प्रमुखता दी। उनका मानना है कि युवा पाठकों को अपनी दुनिया और अपने निर्णय बनाने का अवसर देना ही उन्हें किताबों के प्रति सचेत और उत्साहित बनाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल युग में युवा पाठकों को आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए लेखक को भाषा, शैली और कथानक में नवीनता लानी होती है। साथ ही, कहानी में ऐसे तत्व होने चाहिए जो बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ सकें और उनकी कल्पनाशक्ति को सक्रिय करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि श्रुति राव जैसे लेखक युवा साहित्य को नई दिशा दे रहे हैं। उनके विचार दर्शाते हैं कि बच्चों के लिए साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सोचने और सवाल पूछने की जगह भी हो सकता है। यह सत्र युवा लेखक और अभिभावकों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हुआ, जो बच्चों के साथ संवाद को और समृद्ध बनाने के लिए नए दृष्टिकोण प्रदान करता है।