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दिल्ली हाई कोर्ट ने बिना देश वाली तिब्बती महिला को पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया, MEA के ‘स्वेच्छा से नागरिकता छोड़ी’ दावे को खारिज किया

law  •  👁 9 views  •  04 Feb 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने बिना देश वाली तिब्बती महिला को पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया, MEA के ‘स्वेच्छा से नागरिकता छोड़ी’ दावे को खारिज किया
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बिना देश वाली तिब्बती महिला के पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया और विदेश मंत्रालय (MEA) के उस दावे को खारिज कर दिया कि उसने स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला “भारत में जन्मी और भारत की नागरिक है”, इसलिए उसके पासपोर्ट को रोकने का कोई आधार नहीं है।
इस मामले में महिला ने बताया कि वह जन्म से भारत की नागरिक हैं, लेकिन सरकारी प्रक्रिया में उसकी पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेज़ों को लेकर समस्याएँ आ रही थीं। MEA का कहना था कि महिला ने स्वयं नागरिकता छोड़ दी थी, इसलिए पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि दस्तावेजों और रिकार्ड्स के आधार पर महिला भारतीय नागरिक है और उसका पासपोर्ट मिलने में कोई बाधा नहीं हो सकती।
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह तुरंत प्रक्रिया पूरी करें और महिला को पासपोर्ट प्रदान किया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जन्म और नागरिकता के कानूनी अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यह फैसला नागरिकता और हक के मामले में एक महत्वपूर्ण मिसाल है, खासकर उन व्यक्तियों के लिए जो जन्म से भारत में हैं लेकिन किसी कारणवश आधिकारिक पहचान या दस्तावेज़ में अड़चन का सामना कर रहे हैं।
वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत में नागरिकता और पहचान के अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है। यह मामला दिखाता है कि न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा में कितनी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
इस फैसले से न केवल महिला को राहत मिली है, बल्कि यह अन्य लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण बन सकता है जो दस्तावेज़ी अड़चनों के कारण अपनी नागरिकता साबित करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।