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जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का बेटा बना IAS अधिकारी: त्रिशूर कलेक्टर ने कैसे बदला वही सिस्टम जिसने उन्हें पाला-पोसा

National  •  👁 11 views  •  05 Feb 2026
जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का बेटा बना IAS अधिकारी: त्रिशूर कलेक्टर ने कैसे बदला वही सिस्टम जिसने उन्हें पाला-पोसा
केरल के त्रिशूर जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का बेटा, जिसने बचपन में सरकारी योजनाओं का लाभ लिया, आज उसी सिस्टम का हिस्सा बनकर IAS अधिकारी और त्रिशूर का कलेक्टर बन गया है। यह कहानी न सिर्फ संघर्ष और मेहनत की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जब सिस्टम सही तरीके से काम करता है, तो वह ज़िंदगियां बदल सकता है।
त्रिशूर के कलेक्टर ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान आंगनवाड़ी और महिला-बाल विकास योजनाओं में बड़े सुधार किए हैं। खास बात यह है कि उन्होंने उन योजनाओं को प्राथमिकता दी, जिनसे कभी उनकी मां और उनका परिवार जुड़ा हुआ था। उनकी मां वर्षों तक एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए काम करती रहीं।
IAS अधिकारी बनने के बाद कलेक्टर ने आंगनवाड़ी केंद्रों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार, समय पर मानदेय भुगतान, पोषण आहार की गुणवत्ता और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे कदम उठाए। उनका मानना है कि आंगनवाड़ी सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि समाज की नींव है, जहां से भविष्य का निर्माण होता है।
कलेक्टर ने कई मौकों पर कहा है कि उन्होंने गरीबी, सीमित संसाधन और सामाजिक चुनौतियों को बहुत करीब से देखा है। यही वजह है कि उनकी प्रशासनिक सोच ज़मीनी हकीकत से जुड़ी हुई है। वे चाहते हैं कि कोई भी बच्चा सिर्फ हालात की वजह से पीछे न रह जाए।
यह कहानी लाखों युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रेरणा है। यह साबित करती है कि ईमानदार मेहनत, शिक्षा और एक मजबूत सरकारी प्रणाली मिलकर किसी भी साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण सफलता की राह बना सकते हैं।