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केंद्रीय बजट पर सवाल: विशेषज्ञ बोले—दिल्ली के लिए साफ़ हवा अब भी प्राथमिकता नहीं, पर्यावरण को सेकेंडरी चिंता माना गया

Environment   •   👁 35 views   •   05 Feb 2026
केंद्रीय बजट पर सवाल: विशेषज्ञ बोले—दिल्ली के लिए साफ़ हवा अब भी प्राथमिकता नहीं, पर्यावरण को सेकेंडरी चिंता माना गया
केंद्रीय बजट को देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ माना जाता है, लेकिन इस बार पर्यावरण विशेषज्ञों और नीति विश्लेषकों का कहना है कि दिल्ली जैसे प्रदूषण-ग्रस्त शहरों के लिए साफ़ हवा को बजट में प्राथमिकता नहीं मिल पाई। विशेषज्ञों के अनुसार, पर्यावरण को अब भी “सेकेंडरी चिंता” के रूप में देखा जा रहा है, न कि जीवन जीने के लिए ज़रूरी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर।
दिल्ली हर साल गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करती है। सर्दियों में एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, जिससे बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर सीधा असर पड़ता है। इसके बावजूद बजट में वायु प्रदूषण नियंत्रण, स्वच्छ ऊर्जा ट्रांज़िशन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विस्तार और शहरी हरित क्षेत्रों के लिए ठोस और समर्पित फंडिंग की कमी साफ़ दिखाई देती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार अब भी प्रदूषण को एक मौसमी या अस्थायी समस्या के रूप में देख रही है, जबकि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बन चुका है। साफ़ हवा केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा सवाल है। इसके बावजूद बजट में स्वास्थ्य खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के साथ पर्यावरण को एकीकृत करने का प्रयास कमजोर नजर आता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर वायु प्रदूषण को इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह ट्रीट किया जाए—जैसे सड़क, बिजली या पानी—तो नीतियों की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, निर्माण कार्यों में सख्त पर्यावरण मानक और प्रदूषण निगरानी सिस्टम में निवेश से दिल्ली जैसे शहरों को राहत मिल सकती है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट ने आर्थिक विकास पर जोर दिया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक साफ़ हवा को विकास की बुनियाद नहीं माना जाएगा, तब तक शहरी जीवन की असली समस्याओं का समाधान अधूरा ही रहेगा।